भाषा किसे कहते हैं, परिभाषा, उदाहरण, प्रकार

 मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज में रहने के लिए मनुष्य को अपने विचारों और भावों को व्यक्त करना पड़ता है और दूसरों के द्वारा व्यक्त विचारों और भावों को समझना पड़ता है। इन्हें व्यक्त करने के साधन हमारे पास अनेक हैं। हम शारीरिक या वस्तु संकेत के माध्यम से या मौखिक ध्वनि अथवा लिखित रूप में इन्हें व्यक्त करते हैं।

Bhasha ki Paribhasha – भाषा की परिभाषा

भाषा वह साधन है, जिसके द्वारा मनुष्य बोलकर, सुनकर, लिखकर व पढ़कर अपने मन के भावों या विचारों का आदान-प्रदान करता है।

अथवा

 जिसके द्वारा हम अपने भावों को लिखित अथवा कथित रूप से दूसरों को समझा सके और दूसरों के भावो को समझ सके उसे भाषा कहते है।

अथवा


सरल शब्दों में: सामान्यतः भाषा मनुष्य की सार्थक व्यक्त वाणी को कहते है।

डॉ शयामसुन्दरदास के अनुसार: – मनुष्य और मनुष्य के बीच वस्तुअों के विषय अपनी इच्छा और मति का आदान प्रदान करने के लिए व्यक्त ध्वनि-संकेतो का जो व्यवहार होता है, उसे भाषा कहते है।

भाषा के भेद (Bhasha ke bhed)

भाषा के तीन प्रकार की होती है

(1) मौखिक भाषा 

(2) लिखित भाषा 

(3) सांकेतिक भाषा

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